
बहुत कोशिशें की हॅंसाना नही है।
किसी को अकारण सताना नहीं है।।
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तुम्हारे मिलन की हरीच्छा अधूरी,
मुहब्बत मुझे अब निभाना नहीं है।
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मिले आज हम तुम जमाना हुआ है,
गया जो समय लौट आता नहीं है।
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न इज्जत जहाॅं आपकी हो न जाना,
उस जगह मुझे और जाना नहीं है।
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न ममता रुकी है नहीं वह झुकेगी,
किसी से कभी कुछ छुपाना नहीं है।
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ममता झा
डाल्टेनगंज




