
आओ राधा होरी खेलें
केशर चंदन घोलें
तुम्हारे लिए ।
हरा गुलाबी नीला पीला
सारे रंग लाया
तुम्हारे लिए ।
थोड़ी देर ठहरो कान्हा
पुआ गुझिया लाई
तुम्हारे लिए ।
सखियाँ सारी साथ आई
भर पिचकारी लाई
तुम्हारे लिए ।
रंग मत डारो कान्हा
अंग मेरे कोमल
तुम्हारे लिए ।
प्रीत रंग रंगी राधा
यही सब बोले
तुम्हारे लिए ।
चुनरी मत खींचों कान्हा
लाज मोहे आती
तुम्हारे लिए ।
बाल सखा देख रहे
करे ठिठोली सारे
तुम्हारे लिए ।।
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर



