साहित्य

नूतनवर्षाभिनंदन

वल्लभ यमुनेश्वरी

विगत,बीत गया!
करें,आगत का अभिनंदन!
सतरंगी आभा लिए,इन्द्रधनुषी सृष्टि,कर रही प्रतीक्षा!
समन्वयी सुषमा से , हृदय हो परिपूरित!
सुरभि व्याप्त हो सर्वत्र,प्रसरे सुरभित इत्र!
टूटें संकीर्णता की दीवारें,करें सिर्फ़ समरस विमर्श!
हों अन्तरजातीय,अन्तरधार्मिक विवाह!
जन-जन में हो ,सर्वधर्म समभाव !
जातिवाद का,हो अवसान!
करें समन्वयी भावना का,सतत सम्मान!
क्रिया,प्रतिक्रिया की हो समाप्ति!
हो मन में सिर्फ़,सहिष्णुता की व्याप्ति!
करे राष्ट्र ,विविध -आयामी विकास!
दूर हो ,सभी का संत्रास!
“यमुनेश्वरी”कर रहा,नूतनवर्षाभिनंदन!
करें सब मिल ,भारतमाता का अर्चन!
:वल्लभ यमुनेश्वरी•नैनपुर•

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