
जिन्दगी सदा आगे ही एक इम्तिहान होती है।
एक लम्हा खुशी भरायादों की पहचान होती है।।
एक लम्हा वह होता जो बहुत भारी होता।
जिन्दगी की सच्चाई की निगेहबान होती है।।
कभी खामोशी छा जाती है इतनी जीवन में।
आंखों से आंसू जैसी स्याही ही परवान होतीहै।।
हर कदम बहुत मुश्किल लगता है जीना।
साथी नकोई रहबरजीने का अरमान होती है।।
हर रजा उस रब की मान जीती रही हूँ।
जैसे काटे वह पूरी अब न परेशान होती है।।
दुनियां में गम और खुशी दोनों ही मिलती है।
रिश्तों का वह केवल अब तो फरमान होती है।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




