
गीत- काँवर भर गंगा जल लाते
काँवर भर गंगा जल लाते, बम-बम बोलते।
मधुर भजन कानों में शिव के, मिश्री घोलते।।
भोले-भाले शिव को प्रिय है, शुचि उर भावना।
त्रुटि कोई हो जाए हमसे, बालक जानना।।
पंच बिल्ब पत्रों से प्रसन्न हो, उर पट खोलते।
मधुर भजन कानों में शिव के, मिश्री घोलते।।
भाँति-भाँति की सुंदर काँवर, भोले ला रहे।
श्रद्धा और भक्ति का सागर,जन-जन में बहे।।
भूल सकल पीड़ा काँवरिये, हर्षित डोलते।
मधुर भजन कानों में शिव के, मिश्री घोलते।।
पंडालों में सेवा करते, वह भी भक्त हैं।
वैष्णव, शाक्त पंथ जो माने, शिव आसक्त हैं।।
तुला धर्म की कभी किसी को, शंभु न तोलते।
मधुर भजन कानों में शिव के, मिश्री घोलते।।
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश


