
कौन किसके साथ है देर तक
फूल की खुशबू भी देर तक नहीं रहती
धूप की रंगीनियां भी नहीं रहतीं
और हम तुम क्या चीज है
जो ठहरे रहेगें देर तक
ये गगन ये चाँद ये तारे
ये मद्धम हवा, ये घटाओ के घेरे
ये बदली बरखा, ये फिजायें
सब चले जायेंगे हाथ मलमलके।
लफ्जों के खुश्क शाखेँ,
सूखी नज्में,
ज्यादा देर तक नहीं
टिके रहेंगे यही
कौन किसके साथ है देर तक
स्वरचित एवं मौलिक रचना
-मनोज कुमार यकता
गोण्डा उत्तर प्रदेश



