
मेरी हिंदी को भी समझो ज़रा, ओ अंग्रेज़ी वालो,
ये मेरी मातृभाषा है, दिल की उजली लालो।
तुम सूट-बूट में सजी हुई दफ़्तर की पहचान,
ये खेतों की खुशबू वाली, मेरा सच्चा मान।
तुम कहते “हैलो-हाय” में दुनिया सिमट जाती,
ये “राम-राम” में रिश्तों की गर्मी झलकाती।
तुम्हारी ज़ुबाँ में शोहरत का सारा बाजार,
मेरी बोली में माँ का आशीष अपार।
तुम्हें गर्व “इंटरनेशनल” होने का भाता है,
मुझे गाँव की चौपाल ही स्वर्ग बनाता है।
मत आँको इसकी ताकत को कमतर समझ कर,
इसने इतिहास रचा है समय से लड़कर।
मेरी हिंदी मेरी शान, मेरी पहचान है,
ओ अंग्रेज़ी वालो! ये मेरा हिन्दुस्तान है।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




