
फागुन आयो री सखी
मौसम ने ली अंगड़ाई
सखी फागुन आयो री
बृज की गली गली
होली के रंग में रंग गई री
रंग गुलाल अबीर उड़ी री
गोप गोपियां भींग रहे री
कान्हा के तन रंग डाल रही
बरसाने की छोरी री
मल मल रंग लगावे सखी
पीछे से आकर पकड़ रही
गोरे गोर गालन पर झट सूं
रंग गुलाल लगा ही रही
कान्हा के रंग में चुनर रंगी
मीरा के भजनों पर नाच रही
ये श्याम बजावे बांसुरी तब
सुध बुध सारी खोई रही
फागुन में टेसू चमके
रंग टेसू को लगा रही
केमिकल के रंगों से बच
इस साल की होली खेल रही
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
भवानीमंडी




