साहित्य

बहुत जरूरी है,,,

सौ, भावना मोहन विधानी

समाज के नियमों को अब बदलना होगा,
लड़कियां संभल गई अब बेटों को संभालना होगा।
बेटों की तरह अब बेटियां भी कमाने जाती हैं,
तो बेटों को भी अब बेटी की तरह घर में काम करना होगा।

बेटों को इज्जत चाहिए तो उन्हें इज्जत देनी भी पड़ेगी,
अब इज्जत के बदले गालियां कोई बेटी नहीं सुनेगी।
जीवन जीने के लिए जो काम जरूरी है वह बेटी बेटे दोनों को आने चाहिए,
महज संस्कार की खातिर अब बेटियां घुन की तरह नहीं पिसेंगी।

घर की इज्जत बेटे और बेटी दोनों से होना बहुत जरूरी है,
हर बार सिर्फ बेटी ही ख्वाहिशें मारे क्यों ऐसी मजबूरी है?
घर अगर दोनों का है तो दोनों को नियमों का पालन करना पड़ेगा,
हर घर में अब बेटे और बेटी दोनों को सामान अधिकार देना जरूरी है।

बचपन से ही बेटे और बेटी को सही शिक्षा और सही अधिकार दे,
गलत करने पर सजा और सही करने पर ढेर सारा प्यार दे।
बेटा और बेटी दोनों को महसूस करवाएं की दोनों में कोई फर्क नहीं है,
दोनों को एक समान खुशियां देकर उनके दिल को करार दे।

जब समाज में से बेटे और बेटी का भेदभाव मिट जाएगा,
तभी सच्चे मायनों में हर घर स्वर्ग सा बन जाएगा।
जब बेटा और बेटी दोनों अपने अधिकारों जिम्मेदारियों को समझेंगे,
उस दिन से इस समाज में बहुत बड़ा बदलाव आ जाएगा।

सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।

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