
मेरे छत्रपति, मेरे देश की शान,
यही मेरा और देश का अभिमान।
सिंह-सी दहाड़ लिए रण में उतरे,
मातृभूमि के तुम हो अरमान।
सह्याद्रि की चोटी गूंज उठी थी,
जब गाथा गाई थी बलिदान।
स्वाभिमान की ज्वाला बनकर,
जग में फैला दिया सम्मान।
धर्म, धरा और जन की रक्षा,
था जीवन का एक ही गान।
अन्यायों से टकरा जाने का,
तुमने लिख डाला अभियान।
वीरों के तुम वीर अग्रणी,
रणभेरी का तुम उद्घोष महान।
हर युवा के रक्त में बहते,
बनकर साहस की पहचान।
हे छत्रपति! तेरी जय-जयकार,
गूंजे हर हृदय, हर प्राण।
जब तक सूरज-चाँद रहेगा,
रहेगा तेरा यश गान।
मेरे छत्रपति, मेरे देश की शान,
यही मेरा और देश का अभिमान।
तेरे चरणों में नमन हमारा,
भारत का तू अमर सम्मान।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




