
बसी शिवत्रिशूल पै काशी,भोले की माया है
सब नेति – नेति गाते हैं ,तेरा पार न पाया है
बसी…..
यहाँ घाट हैं बdड़े निराले,गंगा की धारा है
इसमें अस्नान करें जो,उसे पार उतारा है
माँ कलुषनाशिनी है तू , वेदों ने गाया है
सब…….
शिव शीश पै जटा विराजे,माथे चंदा साजे
तन पर सोहे है भस्मी ,कर में डमरू बाजे
तू नील कण्ठ कहलाए,सर्पों ने सजाया है
सब……
सबके भण्डार भरे तू , श्मशान का वासी है
झोली सबकी भरता है और खुद संन्यासी है
भव से तर जाए वो ही, जो शरण में आया है
सब…..
तेरे हाथ में सोहे कमंडल,तेरी बैल सवारी है
गोदी में गणपति लाला ,सँग गौरा प्यारी है
कर्पूर गौर है प्रभु तू , सबके मन भाया है
सब……….
आशा बिसारिया चंदौसी
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