साहित्य

प्रिय नव वर्ष

सुमन बिष्ट

प्रिय नव वर्ष, तुम आ गए हो तो
उजास की सौगातें लेकर आना,
बीते कल की थकन समेटकर
हर मन में एक नई आस जगाना।

जो छूट गया, उसे माफ़ी देना,
जो मिला, उसे संभालना सिखाना,
टूटे हौसलों को फिर साहस देना
नये विश्वास का सहारा देना।

हर आँगन में प्रेम के दीप जलें,
हर द्वार पर प्यारी मुस्कान ठहरे,
जग में न रहे कोई मन सूना
और न कोई आँख नम रहे ।

सबके संघर्षों को साहस देना,
हार को समझ,सीख बनाना,
और छोटी-छोटी खुशियों से
जीवन का अर्थ,आनंद समझाना।

हर रिश्तों में मिठास घुली रहे,
हर संवाद में अपनापन हो,
मनभेद,मतभेद रहें तो भी
हर रिश्ते में प्यार सम्मान हो।

सभी स्वस्थ रहे और प्रसन्न रहे,
मन में शांति संतोष का वास हो,
परिश्रम का फल मिले सबको
और जीवन में दृढ़ विश्वास हो।

हर तरफ प्रेम की गंगा बहती रहे,
करुणा भाव हर दिल में जागना
नव वर्ष, हर वर्ष तुम आते-आते
हर घर को ख़ुशियाँ से रोशन कर जाना।

सुमन बिष्ट, नोएडा

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