
प्रारंभी नेह–
कठिन राह पर चलना सीख लो
दुःख में धीरज रखना सीख लो //
नेह– (1)
अंधी आँधी चलती हैं जमाने में
इन आँधियों से लड़ना सीख लो //
नेह– (2)
खूब अंधेरा, काले हर धंधे जहाँ
उन अंधेरों से निकलना सीख लो//
नेह– (3)
छिप नहीं सकता सच का सूरज
उस सूरज से रोज उगना सीख लो//
नेह–(4)
झूठे सिर सेहरा सच रहा अकेला
शातिर चालों से संभलना सीख लो//
नेह– (5)
हादसों के नाम ‘मनु’ जुल्म हैं कई
सब का सच उजागर करना सीख लो//
परिचयी नेह– (6)
मंजुला शरण “मनु”
राँची, झारखण्ड़।



