साहित्य

पूर्णिका

मंजुला शरण "मनु"

प्रारंभी नेह–
कठिन राह पर चलना सीख लो
दुःख में धीरज रखना सीख लो //
नेह– (1)

अंधी आँधी चलती हैं जमाने में
इन आँधियों से लड़ना सीख लो //
नेह– (2)

खूब अंधेरा, काले हर धंधे जहाँ
उन अंधेरों से निकलना सीख लो//
नेह– (3)

छिप नहीं सकता सच का सूरज
उस सूरज से रोज उगना सीख लो//
नेह–(4)

झूठे सिर सेहरा सच रहा अकेला
शातिर चालों से संभलना सीख लो//
नेह– (5)

हादसों के नाम ‘मनु’ जुल्म हैं कई
सब का सच उजागर करना सीख लो//
परिचयी नेह– (6)

मंजुला शरण “मनु”
राँची, झारखण्ड़।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!