
रामराज्य का सपना पूरा
कौन यहाँ कर पाएगा,
घर-घर बैठे जो रावण हैं
उनको कौन जलाएगा।
सड़क नापते राक्षस सारे
नारी कौन बचाएगा,
नारी को नीचा दिखलाते
इज्जत कौन दिलाएगा।
मात पिता की आज्ञा मा
नेक पुत्र बन जो जाए,
नारी का सम्मान करे जब
सम अधिकार दिला पाए।
सत्य अहिंसा न्याय धर्म का
प्रण दिल से जब कर पाए,
राम सदृश सब त्याग समर्पण
हर प्राणी मन में लाए।
रामराज का सपना पूरा
उस दिन निश्चित हो पाए,
अमन चैन से जब हम सारे
कर्तव्य परायण हो जाएँ।
डॉ. पुष्पा सिंह




