
है बसंती ऋतु खिली मौसम सुहाना हो गया।
आप आए दिल हमारा आशियाना हो गया।।
देखिए तो फूल कलियां भ्रमर के सॅंग झूमती।
आप भी छेड़ो तराना मुस्कराना हो गया।।
संदली बहती हवा ये प्राण नूतन भर रही।
साथ में टहलें जरा हम आशिकाना हो गया।।
दूर मत जाना कभी भी ख्वाब पूरे हैं नहीं।
सच करेंगे स्वप्न सारे आजमाना हो गया।।
मंच पर मिलकर लिखेंगे गजल कविता शायरी,
सब सुनेंगे चाव से ममता तराना हो गया।
******************************
ममता झा मेधा
डालटेनगंज




