साहित्य

रास्ता

राजीव त्रिपाठी

भटकते रहते हैं यूंँ ही दर- ब-दर
मंज़िल से हमारी बात नहीं होती है!!
अपने हक़ में कभी फ़ैसला नहीं ले पाते,
नाव ज़िन्दगी मझधार में,पार नहीं होती है!!
बहुत बेबस है इसलिए रोते हैं
मगर आंँसुओं में वो रफ़्तार नहीं होती है!!
दिल तक नहीं पहुंँच पाती दिल की बातें
गलतियांँ इन्सान से बार-बार होती है!!
मिलने आए हो तो थोड़ा हमसे भी मिलो,
क्यों ग़ैर की महफ़िल में शाम होती है!!
आप अपने हो तो अपने भी दिखाई दो
ज़िन्दगी ज़िद्द-ओ- जहद के नाम होती है!!
हमें तो कुछ भी आसान नहीं लगता
आजकल महफ़िल में उनकी बात होती है!!
हमारे जानिब तो फ़ैसला नहीं होता
ज़िन्दगी बस यूंँ ही तमाम होती है!!
आपके घर आने के कब आसार हैं
अब तो रास्तों से भी हमारी बात होती है!!
रोज़ निहारते हैं तुम्हारा रास्ता
रोज़ आंँखों से बरसात होती है…!

– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान

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