साहित्य

स्वदेशी माटी की खुशबू

ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव

देश की मिट्टी का महत्व ही,तो सबसे ज्यादा होता है।
भारत भूमि बड़ी पावन ये,इससे अपनापन होता है।।
सब के दिलों में स्वदेशी,मिट्टी का एक नाता होता है।
जन्म जहाँ पर हमने पाया,आजीवन भ्राता होता है।।

स्वदेशी माटी की खुशबू,रग-रग में सबके भरा हुआ।
इसी में खेले कूदे बढ़े व,पढ़ लिख खड़ा बड़ा हुआ।।
देश की मिट्टी का मोह प्यार,सम्मान हृदय भरा हुआ।
सेनाओं के वीरों के त्याग,बलिदान से भू भरा हुआ।।

राम कृष्ण नानक बुद्ध,महावीर विवेकानंद भी जन्मे।
लक्ष्मीबाई अहिल्याबाई,नेता सुभाष टैगोर हैं जन्मे।।
भारत भू पर योद्धा वीर,विद्वान महापुरुष भी जन्मे।
कवि लेखक प्रकृतिप्रेमी,ईश के अनन्य भक्त जन्मे।।

विष्णु-श्री के अवतारों,साहित्यकारों से धरती महके।
राष्ट्रप्रेम भारतीय संस्कृति,संस्कारों से धरती गमके।।
देश की मिट्टी का रंग दृश्य,देशप्रेम हर मन में चमके।
स्वदेशी माटी के खुशबू,से सनातन जगत है दमके।।

देश की मिट्टी पर वारी जाऊं,भारत पर गर्व है होता।
भारतीयों के मन सदा,’वसुधैव कुटुंबकम्’ है होता।।
ऋषि मुनि जगतगुरु शंकराचार्य,सबका नाता होता।
भारत माँ के गौरवशाली पूतों,का सम्मान है होता।।

ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़ (उ.प्र.)

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