साहित्य

टेढ़ जानि शंका सब काहू

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’

जरूरी नहीं है कि गलती करने
की ही क़ीमत चुकानी पड़ती है,
कभी कभी ज़्यादा अच्छा होने की
क़ीमत इंसान को चुकानी पड़ती है।

टेढ़ जानि शंका सब काहू,
वक्र चंद्रमा ग्रसै न राहू।

टेढ़े व्यक्ति से सब डरते रहते हैं,
वे सरल स्वभाव के नहीं होते हैं,
उनके अनुसार ही कार्य करते हैं,
उनकी कहीं हर बात मानते हैं।

भले ही उनकी बात ग़लत क्यों
न हो, उन्हें सब सही मानते हैं,
ऐसे लोग केवल अपने स्वार्थ में
दूसरों को दुख भी पहुँचाते हैं।

परंतु सरल स्वभाव के व्यक्ति,
ज़्यादातर दुखी ही रहते हैं,
वे ना नहीं कहते, इसके लिए
कितनी मेहनत क्यों न करनी पड़े।

ऐसे व्यक्ति किसी पर भी शीघ्र
विश्वास करते हैं पर उन्हें धोखा
ही मिलता है फिर भी वह दूसरों
को धोखा देने की नहीं सोचते हैं।

लोग उन्हें दुःख भी दिया करते हैं
वे किसी का दिल नहीं दुखाते हैं,
वे अपनी ख़ुशी से ज़्यादा दूसरों
की ख़ुशी के बारे में ही सोचते हैं।

आदित्य हमें निश्चित करना है
कि ऐसे में आज के इस युग में
हम स्वयं कैसे सुखी रह सकते हैं,
ख़ुद कैसे सुरक्षित रह सकते हैं।

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’
लखनऊ

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