
वे हंंसते हैं
खिल-खिलाकर
ठहाकों के साथ
तेजी से हंसते हैं
वे हंसते हैं क्यों?
वे दुनिया से कुछ छिपाते हैं
ठहाकों के पीछे
छिपा है एक राज
एक आंतरिक पीड़ा है
जो ठहाकों से ढकना चाहते है
……
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज

वे हंंसते हैं
खिल-खिलाकर
ठहाकों के साथ
तेजी से हंसते हैं
वे हंसते हैं क्यों?
वे दुनिया से कुछ छिपाते हैं
ठहाकों के पीछे
छिपा है एक राज
एक आंतरिक पीड़ा है
जो ठहाकों से ढकना चाहते है
……
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज