साहित्य

यह बस छोटी सी जिंदगी लेकिन काम बहुत है

एस के कपूर"श्री हंस"

1
यह छोटी सी जिंदगी लेकिन काम बहुत है।
मेहनत करने वाले को यहां ईनाम बहुत है।।
मत पड़े रहो नफरत की ही काल- कोठरी में।
अगर रहो महोब्बत से तो इत्मीनान बहुत है।।
2
मत कोसो जिंदगी को कि ये वरदान बहुत है।
चाहे इसमें संघर्ष भी और इम्तिहान बहुत है।।
मिलता एक बार जीवन का मोल समझो जरा।
यह जीवन तो अनमोल और महान बहुत है।।
3
सुख-शान्ति से जिओ तो यहाँआराम बहुत है।
अगर उलझे ही रहे तो फिर कोहराम बहुत है।।
बस सीखना है धैर्य विवेक सद्भाव की भाषा।
नफरतों से परे ही प्यार का पैगाम बहुत है।।
4
नई उमर की नई फसल को सिखाना बहुत है।
आज नौजवानों को राह अच्छी दिखाना बहुत है।।
देश का भविष्य संवारने के लिए करना है तैयार।
नई पीढ़ी को तो अभी भी आजमाना बहुत है।।
5
मत सोचो मुश्किलों को जिंदगी आसान बहुत है।
जीतने और उड़ने को ऊपर आसमान बहुत है।।
जिद जोश- जनून की गाँठ अगर बाँध ली तो।
पूरा करने को फिर हर सपना अरमान बहुत है।।
6
लोक-परलोक संवारने का इंतिजाम बहुत है।
इंसान को इंसान बनाने का यहाँ काम बहुत है।।
बाद जिंदगी के स्वर्ग-नर्क की चिंता मत करो।
बनाने को स्वर्ग यही धरती यही जहान बहुत है।।

एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।

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