साहित्य

अपनी मुस्कुराहट नहीं छोड़ते हैं

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’

कांटों में खिल मुस्कुराता है गुलाब,
जीने की अदा सिखाता है गुलाब,
ऐसा ही होता है गुलाब का अंदाज,
कांटों में खिल महकता है गुलाब।

तमाम पहरेदारों से घिरा गुलाब,
महज एक फूल ही नहीं है बल्कि
यह एक ऐसा प्रेरणादायक पुष्प है,
कष्ट में भी हंसने की प्रेरणा देता है।

जिस तरह कांटों के बीच रहकर
गुलाब के फूल आकर्षित करते हैं,
वैसे ही हम व्यक्तित्व को गुलाब
की तरह आकर्षक बना सकते हैं।

आदित्य जैसे गुलाब फूल के पौधे
कहीं भी अपनी जड़ें जमा लेते हैं,
वैसे ही विपरीत हालातों में भी हम
अपनी मुस्कुराहट नहीं छोड़ते हैं।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ

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