साहित्य

बाल कविता- मेरा परिवार

डॉ ऋतु अग्रवाल

पापा, मम्मी, छोटी बहना।
इनके संग ही मुझको रहना।।
उँगली पकड़ चलूँगा इनकी।
मानूँ सदा बड़ों का कहना‌‌

दादी के संग मंदिर जाता।
शिवजी पर मैं दूध चढ़ाता।।
हाथ नहीं जब पहुँचे मेरा।
उछल-उछलकर घंटा बजाता।।

दादा जी से सुनूँ कहानी।
राजा एक, एक थी रानी।‌
बीच-बीच में खाँसे जब वो।
लाऊँ लोटा भरकर पानी।।

यह प्यारा परिवार है मेरा।
रात यही है यही सवेरा।।
जो कुछ भी है हम सबका है।
ना ही मेरा ना ही तेरा।।

सद्यरचित
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश

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