साहित्य

मां

रिया राणावत

जब बच्चा लगाएं पुकार,
तू दौड़ी चली आती हैं।
बिना किसी सवाल के,
तू बस आ जाती हैं।
मां , मां कर वो तेरे पीछे मंडराता ,
तुझे बढ़ी मज़ा आती हैं।
जैसे तूझे ज़्यादा नहीं ,
पर इतने मेही खुश हो जाती हैं।
मां शब्द सुनने के लिए ,
तू बहुत तपस्या करती हैं।
नन्हीं किलकारियों से ,
तू अपना मन भर लेती हैं।
ना शिकायत करती ,
ना रोकती उसको ।
अपना बचपन,
उस बच्चे में देख तू ,
उम्मीदें भर लेती हैं।

– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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