
पार्वती माँ तुझे मैं सजाऊँ।
पुष्प माला चढ़ा के रिझाऊँ।।
पालकी की सवारी सजी माँ।
गीत में रागिनी है बजी माँ।।
ध्यान तेरा सदा मैं करूँ माँ।
गोद तेरी फलों से भरूँ माँ।।
धान्य भी पास तेरे धरे है।
पात्र खाली सभी माँ भरे है।।
भक्त सारे खड़े द्वार तेरे।
दूध हल्दी चढ़े हार तेरे।।
आरती वे करे प्यार से हैं।
ढोल ताशे बजे धार से हैं।।
भोग पूड़ी चना का लगाऊँ।
नौ कुँवारी सुता मैं जिमाऊँ।।
मातु देना मुझे तू सहारा।
कष्ट भी तू मिटाना हमारा।।
श्लोक में छंद में गीत में तू।
भक्त की भक्ति में प्रीत में तू।।
माँ रखो याद मेरी सदा ही।
याद आए मुझे तेरी सदा ही।।
चेतना में रहो संग मेरे।
रंग जाऊँ सदा रंग तेरे।।
मोह माया सभी छूट जाए।
जिंदगी भी खुशी – शांति पाए।।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई।



