
शिव शंकर त्रिपुरारी,भक्तों के हितकारी,
करुणा के भंडारी, शंभू भगवान जी।
डमरू नाद सुनाते,जग को मार्ग दिखाते,
भटके जन को लाते, अपने धाम जी।
नीलकंठ भवभंजन,करते दुख का क्षालन,
मिटता सब संताप, जपे जो नाम जी।
चन्द्र शिखर सुशोभित,गौरा संग विभूषित,
दीनों के हो मित्र, मेरे भोलेनाथ जी।
कृपा दृष्टि बरसाओ,भक्ति दीप जलाओ,
मन मंदिर बस जाओ, शिव भगवान जी।
भवसागर से तारो,दुखियों को उबारो,
करुणा रस की धारो, दयामय नाथ जी।
त्रिनयन जग के स्वामी,सबके अंतर्यामी,
भक्तों के हित कामी, शिव सुखधाम जी।
हर-हर महादेव गूँजे,भक्ति सुधा सब पूँजे,
मंगल धुन जब बजे, मिटे संताप जी।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




