आलेख

बलिया से वाल्मीकि, कैथी से मार्कण्डेय और चित्रकूट से राम…..

डॉ. विद्यासागर उपाध्याय

रामनवमी विशेष…..

वाल्मीकि रामायण के चित्रकूट संबंधी ‘अरण्य कांड’ को पावन आधार बनाकर, महर्षि मार्कण्डेय ने महाभारत के ‘रामोपाख्यान’ में धर्मराज युधिष्ठिर को राघव के अजेय दर्शन का बोध कराया।
मेरा यह आलेख— ‘वेदव्यास प्रणीत महाभारत’ के आरण्यक पर्व के अंतर्गत ‘रामोपाख्यान’ में वर्णित प्रभु श्रीराम’ के माध्यम से ‘बागी बलिया’ की क्रांति-धर्मी चेतना, कैथी के पावन तट पर महर्षि मार्कण्डेय के ‘अमरत्व’ और बुंदेलखंड के ‘राजसी राम’ को एक दार्शनिक सूत्र में पिरोकर, घोर संकट में अटूट धैर्य और राष्ट्रवाद के महामंत्र को प्रतिपादित करने का एक लघु प्रयास है।
वनवास के क्लेश से व्यथित पांडवों को महर्षि मार्कण्डेय ने राघव के जिस ‘स्थितप्रज्ञ’ स्वरूप का बोध कराया था, वही दर्शन आज के नव-भारत हेतु ‘विजय का शाश्वत मार्ग’ है।
आलेख की संपूर्ण वैचारिक यात्रा, अनुक्रमणिका एवं पुस्तक का स्वरूप प्रस्तुत PDF में संलग्न है। आज रामनवमी के इस मंगलकारी अवसर पर प्रभु श्रीराम के श्रीचरणों में मेरी यही प्रार्थना है कि उनका अनंत आशीर्वाद हम सब पर सदैव बना रहे।
— डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
(वेद विद्या मार्तण्ड, महामहोपाध्याय)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!