साहित्य

देखो जमाने वालो में साहब बन गया

कुलदीप सिंह रुहेला

देखो ज़माने वालो, मैं साहब बन गया,
धोती बेचकर आज मैं नवाब बन गया।
कल तक जो साइकिल से धूल उड़ाता था,
आज वही कार में बैठा जनाब बन गया।

पहले चाय उधारी में पीता था चौराहे पर,
अब कैफे में बैठकर लाजवाब बन गया।
कल तक जो भाई” कहकर सबको बुलाता था,
अब “हेलो-हाय” में पूरा जनाब बन गया।

माँ ने कहा बेटा ज़मीन पर ही रहना,
पर सूट पहनकर आसमान का ख्वाब बन गया।
दो पैसे क्या जेब में आ गए मेरे,
मोहल्ले भर का मैं हिसाब बन गया।

कल तक जो धोती में घूमता था गली-गली,
आज टाई लगाकर बड़ा नवाब बन गया।
लोग बोले – अरे भाई ये चमत्कार कैसे हुआ
मैं बोला – बस किस्मत का गुलाब बन गया।

अंदर से वही पुराना देसी आदमी हूँ,
ऊपर से बस थोड़ा सा ख़राब बन गया।
देखो ज़माने वालो, मैं साहब बन गया,
धोती बेचकर आज मैं नवाब बन गया।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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