
लोगों ने वही सुना जो ज़ोर से बोला गया,
वही आवाज़ जिसने गर्व से कहा।
उसने उसे अस्थिर कहा, टूटा हुआ मन बताया,
और दुनिया को बस एक ही पक्ष दिखा दिया।
उसने कुछ टुकड़े दिखाए,
लोग सिर हिलाते रहे।
बिना रुके फैसला सुनाते रहे,
पर किसी ने यह नहीं पूछा कभी—
उस दर्द की वजह क्या थी?
उसके सीने में कौन-से तूफ़ान थे,
कितनी रातें वह अकेली रोई।
किन खामोश दिनों ने उसे तोड़ा,
कौन-सी बेरहमी उसने ढोई।
टूटे हुए दिल को नाम देना आसान है,
कांपती आत्मा पर हँसना आसान है।
गिरते हुए को उंगली दिखाना आसान है,
पर गिरने की वजह कोई नहीं जानता है।
हाँ, शायद वह चिल्लाई होगी,
शायद उसके शब्द बिखर गए होंगे—
पर कौन पूछेगा यह सवाल,
किसने एक औरत को इतना तोड़ दिया होगा?
क्योंकि हर ऊँची आवाज़ में कही कहानी के पीछे
एक और सच्चाई दबी रहती है—
वह सच्चाई जो शायद कभी न सुनी जाए,
कि तुमने मेरे साथ क्या किया था।
एक दिन सच खामोशी तोड़ेगा,
झूठ का चेहरा उतर जाएगा।
तब दुनिया समझेगी यह भी,
कि चुप रहकर वह कितना दर्द पी गई होगी,
और खामोशी में वह कितना जल गई होगी।😔
— रंजीता निनामा
झाबुआ (मध्य प्रदेश)




