साहित्य

गर्मी आई

रंजिता निनामा

गर्मी आई, गर्मी आई,
कूलर बाहर निकाला भाई।

धूप लगे जैसे अंगार,
घर में सबको प्यास अपार।

गन्ने का रस ठंडा-ठंडा,
नींबू शरबत बड़ा ही चंगा।

शाम हुई तो मन इतराए,
ठंडी-ठंडी आइसक्रीम खाए।

छत पर शाम को ठंडी हवा,
गर्मी में भी मज़ा भला।

आम, तरबूज और ककड़ी खाओ,
गर्मी को भी हँसकर बिताओ।

— रंजिता निनामा
झाबुआ, मध्य प्रदेश 🌞🍉🍦

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