साहित्य

गज़ल

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

पावन धरा अयोध्या अवतार हो गया है
गंगा नहा के जीवन केदार हो गया है

अब पूर्ण हो गई है सरयू की ये तपस्या
लाखों दिए जला के त्यौहार हो गया है

वो संतों का तो आना उल्लास मन में लाए
सपनों का राम मंदिर जोहार हो गया है

आओ जनकपुरी के उपहार देख आयें
हनु सिय औ राम लक्षण घरबार हो गया है

चलने लगीं हवाएँ मौसम बसंत की जो
मुझको सरस्वती का दीदार हो गया है

भारत नया बनायें रोशन चिराग करके
कहती नज़र उषा की ज़रदार हो गया है
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश

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