साहित्य

जय माँ ब्रह्मचारिणी

आशा बिसारिया

फूलों से भवन सजाया , तुमको बुलाएँ माँ
हे मैया ब्रह्मचारिणी,अब आ भी जाओ मांँ
फूलों…….
माँ गौरवर्णी है तू और सबसे निराली है
अपने भक्तों की मैया करती रखवाली है
तेरे हाथों में माला है,तू ध्यान सिखाए माँ
आ जाओ…….
तू श्वेत वसन पहने हैं , तेरे हाथ कमण्डल है
शिवके प्रति तेरा तप व भक्ति भी अविचल है
शुभ मार्ग पै चलें हमेशा,संयम सिखलाए माँ
आ जाओ……
अनुशासन बहुत जरूरी,सबको समझाती है
तेरी पूजा करने से ,सिद्धि मिल जाती है
तू सब पै कृपा करती ,करुणा बरसाए मांँ
आ जाओ…..

आशा बिसारिया चंदौसी

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