साहित्य

कात्यायनी

डा. राजेश तिवारी 'मक्खन'

श्री कात्यायनी महामाया , महा योगेश्वरी प्रणाम ।
जब जब भीर पड़ी भक्तों पर , तब तुम आई काम ।।

व्रज बालायें पूजन करती थी श्री कृष्ण को पाने को ।
बालूमय प्रतिमा को गढ़ती , लगती कीरत गाने को ।।
शक्तिपीठ है वृंदावन में , वैवाहिक हो पूरणकाम ।।१
कात्यायनी महामाया ……..

शरद रितु साधना जिनकी , मौसम मस्त रहा है ।
नेति नेति कह वेद बखानें , कवि ने सत्य कहा है ।।
आर्तजनों की सुनती देवी , बनते बिगड़े काम ।।२…..
कात्यायनी महामाया ……..

सुख शांति सम्पत्ति सुयोग्यवर देती यह महारानी ।
व्रजवनिता जो विनती कीन्ही पूरी की वह वानी ।।
षष्ठम् रूप आदिशक्ति तन आभा अनुपम धाम ।।३
कात्यायनी महामाया ,……….

श्री कात्यायनी महामाया , महायोगेश्वरी प्रणाम ।
जब जब भीर पड़ी भक्तों पर , तब तुम आई काम ।।

डा. राजेश तिवारी ‘मक्खन’
झांसी उ प्र
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