
मेरा किरदार अब मैंने साफ कर लिया..
हर किसी की बात को मैंने
आत्मसात कर लिया..
मौका भी है दस्तूर भी है जश्न का..
पर जश्न में शराब को हमने तार तार कर दिया..
अब मैंने अपना किरदार साफ कर लिया..
हर किसी की बात को आत्मसात कर लिया..
भूले भटके ही मिल लिया करता था में अपने आप से..
अब उसको भी ना कर दिया
अब मैंने अपना किरदार साफ कर लिया..
लोगो की बकवास को आत्मसात कर लिया..
शायद शांति से जीने के लिए ये ज़रूरी था..
के मर कर भी जीना था मुझे..
लो आज मैंने अपना किरदार साफ कर लिया!!
मनीष त्रिवेदी
झाबुआ




