साहित्य

क्यों बदल गया इंसान इतना???🙏🏻

रिया राणावत

दिन भर थक के ,
क्यों हार गया में।

थोड़े श्रम से ,
क्यों थक गया में।

सोचता हूं,
क्यों बदल गया इंसान इतना ?
पहले श्रम, कर्म से थकता नहीं था ।

अब जाने क्यों हार गया है?
धीरे धीरे सब ढला बिगाड़ लिया है।

जाने क्यों , इंसान ने अपना जीवन बिगाड़ लिया हैं।

खुदको समय देने की जगह, दिया समय मोबाइल को ।

ना जाने क्यों , इंसान इतना बदल गया है?

– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ (मध्य प्रदेश)

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