
पच्चीस दिसंबर पावन दिन,
तुलसी पूजन का पुण्य विधान,
निर्मल मन से जो करे साधना,
पाता भव से मुक्त निदान।
प्रातः स्नान ध्यान धर दामोदर,
करता जो तुलसी सम्मान,
निश्चय ही वह जीव जगत में,
कर लेता मोक्ष का ज्ञान।
आँगन के पावन चबूतरे पर,
तुलसी वृक्ष सुशोभित छाया,
जल अर्पण से नित सींचे जो,
उसका जीवन धन्य बनाया।
प्रकृति का यह अनुपम वरदान,
जग को अभय दान दिलाया,
तुलसी सेवा से मानव ने,
हर संकट से पार पाया।
शुद्ध वायु का संचार करे,
सकारात्मक ऊर्जा दे,
मच्छर-मक्खी रोग भगाकर,
जीवन को आरोग्य दे।
तुलसी में लक्ष्मी का वास सदा,
घर-घर वैभव भर दे,
भक्ति-पथ का यह अमृत स्रोत,
हर मन को पावन कर दे।
बालक भी संस्कार सीखते,
अनजाने जल चढ़ाते,
तुलसी माता की महिमा से,
ज्ञान-प्रकाश को पाते।
तुलसी वन की छाया में,
पाप रहित मन हो जाता,
ब्रह्म भाव की अनुभूति से,
जीवन धन्य बन जाता।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




