साहित्य

माँ अम्बे

सुनीति केशरवानी'नीति'

भक्ति के, भाव में  ।
मात की, छाँव में ।।
बस यही, कामना ।
हमें तुम, तारना।। -1

हम करें ,वंदना ।
अब तेरी ,साधना ।।
मृत्यु हो ,शरण में।
मात की, चरण में ।।     -2

कोई न, ग्लानी हो।
सदा सच, सानी हो ।।
झूठ का ,नाश हो ।
कभी ना, पाप हो ।। -3

स्वरचित- सुनीति केशरवानी’नीति’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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