
भक्ति के, भाव में ।
मात की, छाँव में ।।
बस यही, कामना ।
हमें तुम, तारना।। -1
हम करें ,वंदना ।
अब तेरी ,साधना ।।
मृत्यु हो ,शरण में।
मात की, चरण में ।। -2
कोई न, ग्लानी हो।
सदा सच, सानी हो ।।
झूठ का ,नाश हो ।
कभी ना, पाप हो ।। -3
स्वरचित- सुनीति केशरवानी’नीति’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश




