साहित्य

मां

रिया राणावत

मां
हैं मां
तेरे कदमों का इंतेज़ार,हो चुका है खत्म,
तू माना सिर्फ ९ दिन के लिए आती है ,
पर मेरे दिल में हमैसा तू ही पाई जाती है ।

मां
हैं मां
तू धरती को पावन ,
ओर जल को शीतल कर जा ,
हमेशा मेरे अंगने में बस जा,

मां
हैं मां
तू ही है हमारी पालन हार ,
अब तेरे शिवा किसका चाहिए साथ ।

– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ (मध्य प्रदेश)

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