
माँ कात्यायनी का दिन आया,
मन में नव उत्साह समाया।
दिव्य रूप माँ कात्यायनी का,
जग में ज्योति पुंज बन छाया॥

चार भुजाओं वाली माता,
सिंह सवारी वीर सुहाती।
कर में खड्ग कमल विराजे,
दुष्ट दलन करुणा बरसाती॥
माँ कात्यायनी का दिन आया……
ऋषि कात्यायन की तपस्या,
माँ ने तब स्वरूप दिखाया।
धर्म रक्षा हेतु धरा पर,
दिव्य अवतार स्वयं ही पाया॥
माँ कात्यायनी का दिन आया……
भक्तों के मन की हर पीड़ा,
पल में हरने वाली माता।
शक्ति, भक्ति, प्रेम लुटाती,
सुख-समृद्धि देने वाली माता॥
माँ कात्यायनी का दिन आया…….
जय-जय माँ कात्यायनी भवानी,
सब पर कृपा दृष्टि बरसानी॥
स्वरचित अप्रकाशित
*दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’*
*जनपद संभल उत्तर प्रदेश*




