
जीवन का हो कोई भी क्षेत्र,
सब में नारी का योगदान।
यह सृजनहार यह मातृशक्ति,
नारी वास्तव में है महान ।।
इसके समान न दूजा कोई,
ईश्वर की अनुपम कृति नारी।
मां बहन बुआ मौसी नानी,
हर रूप में है यह उपकारी ।।
कभी शक्ति है कभी भक्ति है,
कभी प्रीत बनी, कभी मीत बनी।
कभी बनी युद्ध का घोष प्रबल,
कभी जीवन का संगीत बनी ।।
इसको ना दोष कोई भी दे,
यह पावन परम पुनीता है।
इसकी शक्ति अनुपम होती,
यह रामायण यह गीता है ।।
जब अत्याचार बढ़े जग में,
नारी काली भी बन जाती।
दुष्टों का करती है संहार ,
दुष्टों – शक्ति में ठन जाती।।
अच्छाई बुराई सदा जग में ,
पाई जाती हर प्राणी में ।
नारी के प्रति सम्मान रहे,
हर हृदय में हर वाणी में।।
डॉ.अनिल शर्मा ‘अनिल’
धामपुर, उत्तर प्रदेश




