साहित्य

नारी: समाज की रीढ़

अतुल पाठक

वह केवल परिवार की धुरी नहीं,
बल्कि समाज में बदलाव की भी गूंज है।
हर चुनौती में वह साहस दिखाती,
हर मुश्किल को अपने हौसले से तोड़ती।
सपनों को सच करने की उसकी चाह,
हर दिल में उम्मीद की किरण जगाए।
वह प्रेरणा, धैर्य और शक्ति की मिसाल,
हर कदम पर समाज में नया इतिहास गढ़ती।
संघर्षों की आग में भी झुके नहीं,
हर बाधा को अपनी शक्ति से तोड़ती है।
उसकी मेहनत से रोशन हर रास्ता,
उसके हौसले से सबको शक्ति मिलती।
नारी का सम्मान हर दिल में रहे,
उसकी छवि से संसार में उजियारा फैले।
सपनों को अपनी मेहनत से सच कर दे,
उसका गौरव सदा अमर रहे।

अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)

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