
पहले तो स्वीकारिए मैया मेरा प्रणाम
और ध्यान से तब सुनो बात मेरी अविराम
फिर जो करना है, कीजिए आगे कोई काम।
यह मेरी शिकायत नहीं मेरे मन की पीड़ा है
जिसे कहने में डर भी लगता है, पर उठाया मैंने बीड़ा है।
बात इतनी सी है कि आप कहाँ विचरण कर रही हो
देश-दुनिया में क्या हो रहा है,
इस पर भी कुछ ध्यान दे रही हो?
मुझे तो नहीं लगता कि इस पर विचार भी कर रही हो,
बस नवरात्रि में अपने पूजा पाठ की तैयारियों का
घूम-घूमकर इंतजाम देख रही हो।
अब आप मेरा कहना मानो, मानव-मन की पीड़ा जानो।
मुझे लगता है कि आपको ध्यान ही नहीं है
कि रुस-यूक्रेन युद्ध अभी तक चल रहा है
इजरायल-फिलीस्तीन में भी वार-पलटवार चल रहा है,
भारत पाकिस्तान की बात छोड़िए
कम से कम अफगानिस्तान -पाकिस्तान के
आये दिन संघर्ष के बारे में ही सोचिए।
ऊपर से अमेरिका इजरायल गठजोड़ के साथ
ईरान युद्ध का नया वर्जन विनाशक हो रहा है,
विश्व युद्ध का डर दुनिया को सोने नहीं दे रहा है,
निरीह, असहाय निर्दोष मारे जा रहे हैं
जगह-जगह खंडहर के ढेर डरा रहे हैं
नित नये श्मशान आबाद होते जा रहे हैं।
अब ये मत कहना माते!
कि मैं आपको ये समाचार क्यों सुना रहा हूँ?
तो आप भी जान लो मैं तो बस अनुरोध कर रहा हूँ,
डरता भी मगर अपनी माँ से ही तो बक-बक रहा हूँ।
अब आप कुछ कीजिए माते
चण्डी-काली-दुर्गा रुप दिखाइए
युद्ध के रावणों राक्षसों को मारिए,
आम जन-मानस को अपने होने का अहसास कराइए।
सिर्फ भारत ही नहीं अखिल विश्व में
शांति स्थापित करने की राह दिखाइए,
शक्ति से, शांति से, प्यार या प्रहार से
जैसे भी हो हर युद्ध की आग को अब तो बुझाइए,
विराम लगाने के लिए अपने प्रभाव का दर्शन कराइए।
अपने भक्तों, अभक्तों के मन से
विश्व युद्ध का डर अबिलंब दूर भगाइए,
हे आदशक्ति मैया! नवरात्रि से पहले
बस इतना कर धरती के हर प्राणी को
भयमुक्त होने का अहसास कराइए,
इस नादान की फरियाद पर नाराज़ होने के
पहले अट्टहास कीजिए या मुस्कराइए,
पर जैसे भी हो सारे युद्ध पर
अब तो लगाम लगाइए, संदेह के बादल हटाइए।
और फिर निश्चिंत होकर आइए
नवरात्रि में अपनी पूजा, आरती,
जप, साधना खूब कराइए,
अपने भक्तों को दिलों आसन जमाइए
अपनी जय-जयकार कराइए
सबके साथ मुझ पर भी अपनी कृपा बरसाइए।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा उत्तर प्रदेश




