रिया राणावत, की कविता, आत्मा से निकल आया हर शब्द है, आनेवाल कल उसका है
डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ जिले की कालीदेवी जैसे कस्बे में कक्ष 12 बी का छात्रा है
रिया राणावत जी, विगत कुछ कविता उनकी उन्होंने मुझे भेजी थी
फिर लगातार इन्हें ग्राम टुडे दैनिक चर्चित समाचार लिंक पर देखा रहा हूं , उनकी नई कविता है और नई कविता मेरी प्रिय विद्या है, उसे लिखने ,पढ़ने सुनने की शौक है समय निकाल अक्सर पढ़ता हूं
उनकी कविता सचमुच उनके नारी शक्ति के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करती हुई दिखाई देती हैं आज भी नारी संघर्ष से रही है परम् सत्य स्वीकार करना होगा जब उनकी कविता को पढ़ते हैं तो
प्रकृति प्रेम को महत्व देती उनकी अद्भुत सोच और चिंतन है जो सदियों जिंदा रहेगा और आनेवाले युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए है
मात्र चोटी सी उम्र में इतनी संवेदनशील भावुकता और उम्दा कलम संजीदा सोच और चिंतन
सचमुच उनके आने वाले कल को साबित करता यह बताता है कि
आनेवाल कल उनका है यदि कोई
इसी तरह सतत् सृजन शील रहती है
तो सचमुच हिंदी साहित्य एक उम्दा प्रस्तुति धनी और सोच और चिंतन लिए एक महिला सशक्त कवियत्री मिलेगी जो अपनी अद्भुत पहचान बना रचनाओं से हिन्दी भाषा को जीवन्त रखें सक्रिय रखें ऊर्जा प्रदान करेगी
उन्हें शुभ कामनाएं बधाई और आशीष देता हूं ईश्वर सदा उनके साथ बैठे रहे ओर सृजन धरा में लीन हो मस्त और खुश रहे
आशीष सदा इस अद्भुत प्रतिभा धनी पुत्री रिया राणावत जी को
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




