
किरणों ने आके आज, भोर को जगाया है,
नभ ने सुनहरी देख, चादर को तानी है।
थकन हफ़्ते की सब, पल में बिला गई,
अवकाश की यह बेला, बड़ी सुखदानी है॥
चाय की पियाली हाथ, फुर्सत के संग साथ,
मंद मंद चले वायु, जैसे मृदु गानी है।
पंछी चहचहा रहे, तरु मुस्का रहे,
आज की सुबह मानों, परियों की रानी है॥
मन के झरोखे खुले, भावों के पराग घुले,
लेखनी भी आज मग्न, रचती कहानी है।
भागदौड़ छोड़ पीछे, निज से मिलन आज,
शांति की सरिता यहाँ, बहती रूहानी है॥
भूलें सब उलझनें, आनंद में सराबोर,
जीवन की बगिया में, छाई अब जवानी है।
सुमन सुवासित हो, खिलें आज सब दिल,
खुशियों का रविवार,ईश मेहरबानी है॥
पूर्णिमा सुमन
झारखंड धनबाद




