साहित्य

परीक्षा खत्म, धमा-धम-धम

रंजीता निनामा

परीक्षा खत्म, नाचो सब धमा-धम-धम,
ढोल बजे जोर से, धमा-धम-धम।

कॉपी रखो दूर, किताबें सब कम,
खुशियाँ ही खुशियाँ, धमा-धम-धम।

घंटी भी बोले, खत्म हुआ ग़म,
अब खेलो-कूदो, धमा-धम-धम।

दोस्तों के संग, मचाओ तुम धम,
हँसी गूंजे हरदम, धमा-धम-धम।

आइसक्रीम खाओ, मिठास है जम,
झूले पे झूलो, धमा-धम-धम।

छुट्टियाँ आईं, मस्ती का है संग,
नाचो-गाओ मिलकर, धमा-धम-धम! 🎉

रंजीता निनामा
झाबुआ, मध्यप्रदेश

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