साहित्य

श्री राम स्तुति

श्रीमती लक्ष्मी चौहान 'रोशनी'

शत शत वंदन और अभिनन्दन,
जय-जय, जय हो, जय रघुनंदन,
राघव, रघुपति, रघुनाथ, रघुवर
जय-जय हो, जय दशरथनंदन ।

दुःखभंजन, सकलसंहारी,
भव-भय भंजन, लोकहितकारी,
दुष्टदलन, दीनदयाला,
सत्य सनातन, मंगलकारी।

करुणा-वरुणालय, परम तपस्वी,
अनादि अनंत और ओजस्वी,
त्रिलोक पति, मर्यादा पुरुषोत्तम,
सबके प्रिय, जग में यशस्वी।

सत्य स्वरूप, सुख के दाता,
दुखियों के तुम भाग्य विधाता,
प्रभु तुम हो जग के रखवारे,
सारा जग तुम्हारी महिमा गाता।
श्रीमती लक्ष्मी चौहान ‘रोशनी’
कोटद्वार, उत्तराखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!