साहित्य

वीणा के दोहे

वीणा अब्राहम सिंह

बेटी, बहना, माँ बने, रूप अनेक महान।
नारी के हर रूप में, बसता है भगवान॥

नारी शक्ति अपार है, उसका ऊँचा मान ।
उसके साहस से बने, हर मुश्किल आसान।

संकट में भी हँस पड़े, रखे अटल विश्वास।
नारी के विश्वास में, नारायण का वास ॥

ममता, साहस, त्याग से, गढ़ती नव इतिहास।
नारी के संकल्प में, पूरा हुआ विकास॥

मन में है ममता बसे , नारी जग का सार।
तन से है दुर्बल भले, सहले दुख के वार।

🍁वीणा अब्राहम सिंह🍁
(आगरा, उत्तर प्रदेश)

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