
बेटी, बहना, माँ बने, रूप अनेक महान।
नारी के हर रूप में, बसता है भगवान॥
नारी शक्ति अपार है, उसका ऊँचा मान ।
उसके साहस से बने, हर मुश्किल आसान।
संकट में भी हँस पड़े, रखे अटल विश्वास।
नारी के विश्वास में, नारायण का वास ॥
ममता, साहस, त्याग से, गढ़ती नव इतिहास।
नारी के संकल्प में, पूरा हुआ विकास॥
मन में है ममता बसे , नारी जग का सार।
तन से है दुर्बल भले, सहले दुख के वार।
🍁वीणा अब्राहम सिंह🍁
(आगरा, उत्तर प्रदेश)




