
विचारों की अभिव्यक्ति को कहती *कविता*
संपादित कर भावों को उकेरती शब्दों में
कागजों पर बिखर जाते कितने रूप
हर नई कविता का अलग आधार
कहीं गम का कही खुशी का एहसास
अपरिमित भावनाओं का प्रतिबिंब
तिरोहित सी वेदना को अलंकृत कर
*कविता* में बोलता खामोश पन्ना
शब्दों की गहरी सुंदरता
छंदो व अलंकारों में भावों में कहना
अपने अनुभवों का पन्नों पे उकेरना
कल्पनाओं के आधार को समेटना
अनुप्राणित कर शब्दों को पिरोना
हृदय में जागते भावों को संजोना
हर पीड़ा वेदना को जीती है *कविता*
हर प्रश्न चिन्ह को लिखती है *कविता*
अनंत विचारों का सार *कविता*
क्षितिज से शून्य का दर्पण *कविता*
*” कविता नामदेव “,….* नजीबाबाद बिजनौर (उ.प्र)



