साहित्य

वो भी आँखो का तारा

पायल अग्रवाल 'छनक'

बेटियों पर होता है जो -जो अत्याचार |
हर बेटा भी होता नहीं उसका जिम्मेदार ||
अलख जगाओ बेटी बचाओ देते हम नारा |
चिराग बचाओ वो भी आँखो का तारा ||

बेटी अपने हक का करती दुराचार |
बेटों का क़ानून से दो अधिकार ||
मच रही चहु ओर दिशा हाहाकार |
चीख सुनो उस माँ की चित्कार ||

बेटी को दुल्हन बना लाती अपने द्वार |
बेटा दे माँ कर देती खुशियाँ वार ||
वो बेटी सुपारी दे पति को देती मार |
पल में करती मानवता संघार ||

सह देना बेटी को इतना भी मत बिगाड़ |
करुणा, ममता का सीख अरु उपकार |
दिया होता तो होता नहीं नर संहार|
जाग-जाग सुन मानवता की पुकार ||

पायल अग्रवाल ‘छनक’
मुजफ्फरपुर
बिहार

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