
गुरू से नीमन चेला बा,
सब पैसा के खेला बा।
जेकरा मानीटर मानीले,
पढ़ै में बिल्कुल ढ़ेला बा।
गाँव छोड़ ऊ शहर गइल,
बबुआ गजब अकेला बा।
राजा कबो रंक होखेला,
सब किस्मतिये खेला बा।
हक़ के रोटी नसीब में न,
“रहमत” बड़ा झमेला बा।
शेख रहमत अली “बस्तवी”
बस्ती (उ.प्र)




