
हे! गुरुदेव शत शत मेरा,प्रणाम आपके चरणों में।
जगत के समस्त तीरथ,धाम हैं आपके चरणों में।।
भू पर सब धर्म धाम,माता-पिता गुरु के चरणों में।
ऋषि मुनि गुरु सद्गुरु हैं,ईश्वर-सा गुरु चरणों में।।
बारंबार मेरा सादर प्रणाम,आपके शुचि चरणों में।
हे ! गुरुदेव कोटिशः प्रणाम,आपके श्रीचरणों में।।
सारे संसार के दुखहर्ता,कष्टहरण करें सतगुरु मेरे।
गुरु चरणों में शीश झुका,लेने को चरण रज तेरे।।
कृपा आपकी होती है,तो शक्तिहीन बलवान बने।
गुरु की आशीष कृपा से,मूरख भी गुणवान बने।।
हे!गुरुवर आपके दर ही,गुरुभक्त पधारें चरणों में।
हे!गुरुदेव बारंबार नमन,प्रणाम पावन चरणों में।।
जननी जनक बंधु सुत दारा,गुरुवर ने पार उतारा।
काया को गुरुदेव कृपा ने,भव पार करा के तारा।।
मोह माया संलिप्त मानव को,उस सद्कर्मों द्वारा।
सद्गुरु शिक्षा देकर,भव बंधन से मुक्त कर तारा।।
हे!गुरुवर आपके दर ही,गुरुभक्त पधारें चरणों में।
हे!गुरुदेव बारंबार नमन,प्रणाम पावन चरणों में।।
क्वार-चैत्र मास नवरात्र द्वय में,व्रत हो दुर्गा माता।
नौ दिन व्रत कुछ प्रतिपदा-अष्टमी,ही रखें माता।।
शारीरिक शक्ति जैसे होती,मर्जी वो देवी-विधाता।
गुरु सतगुरु देवी-देव की ही,जैसे कृपा नर धाता।।
हे!गुरुवर आपके दर ही,गुरुभक्त पधारें चरणों में।
हे!गुरुदेव बारंबार नमन,प्रणाम पावन चरणों में।।
हे! गुरुदेव प्रणाम आपके पावन श्रीचरणों में।
ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.


